Description
यह कविता-संग्रह एक ऐसे मन की यात्रा है, जिसने बीमारी के कठिन दिनों में भी जीवन के अर्थ, संघर्ष, आशा और मानवीय संवेदनाओं को शब्दों में पिरोया। इन कविताओं में पीड़ा है, आत्ममंथन है, रिश्तों की ऊष्मा है और विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराने का साहस है। संग्रह में परिवार, डॉक्टरों और आसपास की दुनिया से जुड़े कुछ रोचक एवं हल्के-फुल्के संस्मरण भी शामिल हैं, जो गंभीर भावनाओं के बीच मुस्कान बिखेरते हैं। यह पुस्तक जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने और हर परिस्थिति में आशा बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
About Author
वेद मेहता एक स्वतंत्र लेखक हैं, जिनके लेख भारत एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार-पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं। लंबे समय तक कॉर्पोरेट जगत में कार्य करने के बाद, जीवन ने उन्हें एक कठिन बीमारी के रूप में नई चुनौती दी। उसी दौर के आत्ममंथन, संघर्ष और जीवनानुभवों ने इस कविता-संग्रह को जन्म दिया। वे स्वयं विनम्रता से कहते हैं, “मैं कोई कवि नहीं हूँ, बस हिन्दी भाषा का एक प्रेमी हूँ।” उनकी रचनाएँ जीवन के यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं, संघर्ष और आशा को सरल, सच्चे तथा आत्मीय शब्दों में अभिव्यक्त करती हैं।






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