Description
यह पुस्तक “विकसित भारत २०४७ और भारतीय ज्ञान परंपरा का अंतर्संबंध” भारत के भविष्य निर्माण की अवधारणा को भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, गीता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के आलोक में प्रस्तुत करती है। इसमें आत्मनिर्भरता, नैतिकता, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों का समकालीन संदर्भ में गंभीर विश्लेषण किया गया है। यह कृति विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं नीति-निर्माताओं के लिए चिंतन और मार्गदर्शन का प्रेरक स्रोत सिद्ध होती है।
About Author
डॉ. कुमारी भारती मालतीधारी कॉलेज, नौबतपुर, पटना (पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, बिहार) में दर्शनशास्त्र की सहायक प्राध्यापिका हैं। वे पीएच.डी. (दर्शन), यूजीसी नेट उत्तीर्ण तथा स्नातकोत्तर स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त विदुषी हैं। उन्हें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में १५ वर्षों का अध्यापन अनुभव है। उनकी एक शोध पुस्तक तथा छह संपादित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सक्रिय सहभागिता कर चुकी हैं और विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित हुई हैं।






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